Raghav Chadha Z Security: आखिर कैसे मिलती है ये हाई-लेवल सुरक्षा और कितना आता है खर्च? जानकर रह जाएंगे हैरान?

Raghav Chadha Z Security: आम आदमी पार्टी के नेता Raghav Chadha की Z श्रेणी सुरक्षा को लेकर इन दिनों देशभर में चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में उनकी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव और केंद्र द्वारा Z कैटेगरी सुरक्षा दिए जाने के फैसले ने इस मुद्दे को और सुर्खियों में ला दिया है।

Raghav Chadha Z Security: आखिर कैसे मिलती है ये हाई-लेवल सुरक्षा और कितना आता है खर्च? जानकर रह जाएंगे हैरान?
Z+ Security का असली सच! कैसे मिलती है और कितना खर्च आता है?

 

भारत में VIP सुरक्षा पूरी तरह खतरे के आंकलन (Treat Perceptions) पर आधारित होती है, जिसे खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाता है। Z श्रेणी सुरक्षा देश की सबसे मजबूत सुरक्षा मानी जाती है, जिसमें करीब 20 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी 24 घंटे सुरक्षा देते हैं।

खास बात यह है कि इस तरह के हाई-लेवल सुरक्षा पर हर महीने लाखों रुपए खर्च होते हैं। कुछ मामलों में, यह खर्च सरकार उठाती है, जबकि निजी व्यक्तियों को खुद भुगतान करना पड़ता है। आखिर में सवाल उठता है कि Z सुरक्षा कैसे मिलती है और इसके पीछे का पूरा सिस्टम क्या है?आज के लेख में इसी को समझेंगे।

Raghav Chadha Z Security: राजनीतिक गलियारों में इन दिनों राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को मिलने वाली सुरक्षा को लेकर बड़ी हलचल है, पंजाब सरकार द्वारा उनकी ‘Z+’ सुरक्षा हटाए जाने के बाद अब केंद्र सरकार द्वारा उन्हें ‘Z’ श्रेणी का कवर देने की खबरें आ रही हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर यह ‘Z’ सुरक्षा होती क्या है?

किसी व्यक्ति को यह सुरक्षा कैसे आवंटित की जाती है और इस पर होने वाला भारी-भरकम खर्च कितना होता है?और इसका बोझ किसकी जेब पर पड़ता है? आइए सुरक्षा की अभेद्य दीवार के पीछे का पूरा गणित विस्तार से समझते हैं।

क्या है Z श्रेणी  की सुरक्षा कवच?

Raghav Chadha Z Security: भारत में सुरक्षा व्यवस्था को कई श्रेणियों में बांटा गया है, ‘Z’ श्रेणी को दूसरा सबसे मजबूत सुरक्षा घेरा माना जाता है, इस सुरक्षा कवर के तहत संबंधित व्यक्ति की सुरक्षा में कुल 22 जवान तैनात रहते हैं, इन जवानों में दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, के सशस्त्र जवान शामिल होते हैं।

सुरक्षा को और पुख्ता बनाने के लिए इसमें नेशनल सेक्यूरिटी गार्ड (NSG) के कमांडो भी तैनात किए जा सकते हैं। इस घेरे में तैनात कमांडो सातों दिन अब चौबीस घंटे संबंधित व्यक्ति की सुरक्षा करते हैं।

सुरक्षा का अभेद्य घेरा और आधुनिक हथियारों से लैस Commando 

Raghav Chadha Z Security: ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा पाने वाले व्यक्ति को न केवल जवानों का पहरा मिलता है, बल्कि उन्हें एक एस्कॉर्ट कार भी मुहैया कराई जाती है, इसमें शामिल सुरक्षाकर्मी आधुनिक हथियारों से लैस होते हैं। Commandos को मार्शल आर्ट्स और बिना हथियारों के लड़ने की विशेष श्रेणियां दी जाती हैं। इस श्रेणी से ऊपर ‘Z+’ सुरक्षा होती है, जिसमें कुल 55 जवान तैनात होते हैं। राघव चड्ढा के मामले में चर्चा है कि उन्हें दिल्ली और पंजाब में  ‘Z’ सुरक्षा दी जा सकती है, जबकि अन्य राज्यों के लिए ‘Y’ प्लस श्रेणी का कवर दिया जाएगा।

कैसे तय किया जाता है कि सुरक्षा की जरूरत है?

Raghav Chadha Z Security: भारत में किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा देना या न देना पूरी तरह से ‘खतरे की आकलन’ पर निर्भर करता है। इसके लिए IB और संबंधित राज्यों की खुफिया एजेंसियां अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी है। अगर रिपोर्ट में यह पुष्टि होती है कि किसी व्यक्ति की जान को आतंकवादियों, कट्टरपंथियों या किसी अन्य स्रोत से गंभीर खतरा है, तभी उसे सुरक्षा प्रदान की जाती है। यह प्रक्रिया काफी लंबी और गोपनीय होती है, जिसमें समय समय पर सुरक्षा की समीक्षा भी की जाती है।

कितने पैसे खर्च करने होते हैं?

हैरान करने वाली बात यह है कि अगर कोई उद्योगपति या निजी व्यक्ति सरकार से इस तरह की सुरक्षा की मांग करता है, तो उसका पूरा खर्च उसे खुद उठाना पड़ता है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में Z श्रेणी की शुरुआत का मासिक खर्च लगभग 15 से 20 लाख रुपए के बीच होता है।

वहीं  Z+ सुरक्षा के लिए यह आंकड़ा 40 से 50 लाख रुपए तक प्रतिमाह तक पहुंच सकता है। इसमें तैनात 22 से 55 जवानों के वेतन से लेकर हथियारों और वाहनों तक का पूरा बिल संबंधित व्यक्ति को भुगतान करना होता है।

किसकी जेब पर पड़ता है सुरक्षा का खर्च?

वीआईपी सुरक्षा एक अत्यंत खर्चीली व्यवस्था है, इसमें तैनात जवानों का वेतन, उनके रहने-खाने का इंतजाम और सुरक्षा वाहनों का ईंधन काफी महंगा पड़ता है। नियमानुसार संवैधानिक पदों पर बैठी व्यक्तियों, मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा का खर्च सरकार खुद उठाती है। यह पैसा आमतौर पर उस राज्य सरकार के बजट से आता है जहां वह व्यक्ति निवास करता है। केंद्र सरकार की ओर से दी जाने वाली सुरक्षा का खर्च केंद्रीय गृह मंत्रालय वहन करता है, लेकिन इसके पीछे जनता के टैक्स का पैसा ही खर्च होता है।

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