Four Stars of Destiny : भारत की संसद में हाल ही में एक अप्रकाशित किताब (Four Stars of Destiny) को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद देखने को मिला। यह किताब भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने द्वारा लिखी गई है। आइए समझते हैं कि वे कौन हैं।किताब में क्या बताया गया है और इस पर इतना हंगामा क्यों हो रहा है।
Who is General M.M. Narvane ? जनरल एम.एम. नरवाने का परिचय। (Four Stars of Destiny)
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भारतीय सेना के एक वरिष्ठ और सम्मानित अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारत के 28th चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ के रूप में सेवा दी। उनका कार्यकाल ऐसे समय में रहा जब देश को एक साथ कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा जिनमें कोविड-19 महामारी, भारत-चीन सीमा तनाव और उत्तरी सीमा पर सैन्य टकराव जैसी परिस्थितियां शामिल थीं। इस कठिन दौर में, उन्होंने सेना का नेतृत्व संतुलित रणनीति और ऑपरेशनल दृढ़ता के साथ किया।
जनरल नरवणे ने लगभग 4 दशकों तक भारतीय सेना में सेवा दी। वे पुणे स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) और इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) से प्रशिक्षित अधिकारी हैं। उन्हें जमीनी ऑपरेशन स्टाफ नियुक्तियों और अंतर्राष्ट्रीय सैन्य सहयोग तीनों स्तरों का व्यापक अनुभव रहा है, यही कारण है कि उन्हें एक मजबूत रणनीतिक और ऑपरेशनल लीडर के रूप में जाना जाता है।
उनके नेतृत्व में सेना ने पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ लंबे गतिरोध का सामना किया, गलवान घाटी संघर्ष के बाद सीमा क्षेत्रों में तैनाती, लॉजिस्टिक मजबूती और सामरिक तैयारी को तेज किया गया। इस अवधि में सेना ने उच्च ऊंचाई वाले इलाकों में दीर्घकालिक तैनाती की नई मिसाल भी स्थापित की।
जनरल नरवणे के कार्यकाल में रक्षा आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण पर भी जोर बढ़ा मेक। इन इंडिया के तहत रक्षा खरीद और स्वदेशी सैन्य उपकरणों को बढ़ावा देने की दिशा में कई अहम कदम आगे बढ़े, साथ ही उनके समय में सैन्य संस्थानों में संरचनात्मक सुधार और प्रशिक्षण ढांचे को भी मजबूत किया गया।
Four Stars of Destiny : किताब का क्या है विवरण ?
यह जनरल नरवणे की लिखी हुई एक Memoir (संस्मरण पुस्तक) है, जिसमें उनके सैन्य अनुभव, सीमा तनाव, निर्णय प्रक्रिया और उच्च स्तरीय बैठकों के बारे में उल्लेख किया गया है।
क्या होता है (Memoir) संस्मरण ? (Four Stars of Destiny)
Memoir का मतलब होता है, संस्मरण। यह एक ऐसी किताब या लेख होता है जिसमें कोई व्यक्ति अपने जीवन के खास अनुभव, घटनाओं और यादों को अपनी नजर से लिखता है। इसमें पूरा जीवन नहीं बल्कि चुनिंदा महत्वपूर्ण समय फैसले या परिस्थितियां शामिल होती हैं। मेमोयर में लेखक अपनी भावनाएँ सोच सीख और व्यक्तिगत अनुभव साझा करता है। यह आत्मकथा (Autobiography) से अलग होती है , क्योंकि आत्मकथा में पूरा जीवन क्रमवार लिखा जाता है, जबकि Memoir किसी विशेष दौर या अनुभव पर केंद्रित होती है।
Why is the unpublished book controversial ? किताब पर विवाद क्यों है ? (Four Stars of Destiny)
विवाद की मुख्य वजह किताब के वे अंश बताए जा रहे हैं, जिनमें भारत- चीन सीमा तनाव, विशेष रूप से 2020 के पूर्वी लद्दाख और गलवान घाटी संघर्ष से जुड़े संवेदनशील सैन्य विवरण शामिल हैं। इन अंशों में उच्च स्तर पर लिए गए फैसलों, सेना की रणनीति, टैंक तैनाती और 31 अगस्त, 2020 की रात हुई घटनाओं का उल्लेख है। इसके अलावा राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच संवाद , निर्देश मिलने में हुई देरी और कुछ नीतिगत फैसलों पर की गई टिप्पणियां भी सामने आई हैं। चूंकि यह किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है। और इसकी सुरक्षा जांच चल रही है।इसलिए इसके अंशों को सार्वजनिक मंच पर पढ़े जाने को लेकर विवाद पैदा हुआ है।
Top Leadership Communication Under Pressure(Four Stars of Destiny)
किताब के कथित अंशों में यह उल्लेख बताया जाता है कि एक बेहद संवेदनशील सैन्य परिस्थिति के दौरान शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व से स्पष्ट निर्देश मिलने में देरी हुई। लेखक के अनुसार, सीमा पर स्थिति तेजी से बदल रही थी और जमीनी स्तर पर तैनात सैन्य अधिकारियों को तुरंत निर्णय लेने की आवश्यकता थी। संचार और आदेश की प्रक्रिया अपेक्षा से धीमी रही जिससे कमांड स्तर पर दबाव बढ़ा। ऐसे विवरणों को राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता रहा है क्योंकि वे संकट के समय सरकार- सेना समन्वय पर सवाल खड़े कर सकते हैं, इसलिए इस हिस्से पर विशेष विवाद हुआ है।
Agnipath scheme mentions | अग्निपथ योजना पर टिप्पणियां (Four Stars of Destiny)
रिपोर्टों के अनुसार जनरल नरवाने की अप्रकाशित संस्मरण पुस्तक ने अग्निपथ, भरती योजना और सेना से जुड़े संरचनात्मक सुधारों पर भी लेख मिलता है। बताया जाता है कि किताब में नई भर्ती मॉडल के संभावित प्रभाव, प्रशिक्षण व्यवस्था, यूनिट संरचना और दीर्घकालिक सैन्य तैयारी जैसे पहलुओं पर विचार रखे गए हैं। अग्निपथ योजना का उद्देश्य सेना को युवा प्रोफाइल देना और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना बताया गया है। लेकिन इसे लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर बहस भी हुई है। ऐसे में किसी पूर्व सेना प्रमुख द्वारा इस योजना पर की गई टिप्पणियां स्वाभाविक रूप से ध्यान आकर्षित करती हैं चूंकि यह विषय राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा नीति से जुड़ा है, इसलिए किताब के ये हिस्से भी संवेदनशील माने जा रहे हैं और प्रकाशन से पहले समीक्षा के दायरे में रखे गए हैं।
लोकसभा में टकराव अप्रकाशित किताब के उद्धरण पर विवाद (Parliament Row Over Unpublished Book in Lok Sabha)
हालिया लोकसभा सत्र के दौरान उस समय तीखा विवाद खड़ा हो गया जब विपक्ष के नेता ने एक मैगजीन में प्रकाशित लेख का हवाला देते हुए जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब के कुछ अंश पढ़ने की कोशिश की, विपक्ष का तर्क था कि चूंकि ये अंश पहले ही मीडिया में आ चुके हैं, इसलिए उन पर चर्चा करना उचित है। वहीं, सत्ता पक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि जिस किताब का आधिकारिक रूप से प्रकाशन नहीं हुआ है। उसके कथित अंशों को संसद के रिकार्ड में पढ़ना नियमों के खिलाफ है।
सत्ता पक्ष का कहना था कि अप्रकाशित और आधिकारिक रूप से सत्यापित न किए गए किसी भी दस्तावेज या पुस्तक का हवाला संसद में नहीं दिया जा सकता, खासकर तब जब उसका संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा मामलों से हो। इसी मुद्दे पर नियमों की व्याख्या को लेकर दोनों पक्ष आमने सामने आ गए शोर-शराबे और विरोध के चलते सदन की कार्यवाही बार बार बाधित हुई और वह आगे नहीं बढ़ सकी।
Why Government Review Happens Before Publishing Military Memoirs?
भारत में जब कोई पूर्व सैन्य अधिकारी अपने अनुभवों पर आधारित संस्मरण मेमोयर लिखता है, तो उस किताब को प्रकाशित करने से पहले अक्सर सरकारी और सैन्य समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसका मुख्य उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रोकना नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों की रक्षा करना होता है।सैन्य सेवा के दौरान अधिकारियों को कई ऐसी जानकारियां मिलती हैं जो सार्वजनिक होने पर देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
कई बार संस्मरणों में सैन्य अभियानों की रणनीति, तैनाती से जुड़े विवरण, कमांड स्ट्रक्चर, हथियार प्रणालियों या खुफिया सूचनाओं का उल्लेख हो सकता है, भले ही ये जानकारियां लेखक की नजर में ऐतिहासिक या अनुभवात्मक हो, लेकिन विरोधी देशों के लिए वे आज भी उपयोगी साबित हो सकती हैं, इसलिए ऐसे संवेदनशील ऑपरेशनल विवरणों की जांच जरूरी मानी जाती है।
इसके अलावा भारत में ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट लागू है जिसके तहत कुछ सूचनाओं को सार्वजनिक करना कानूनन अपराध हो सकता है। यदि किसी किताब में अनजाने में भी गोपनीय जानकारी आ जाती है तो वह कानूनी विवाद का कारण बन सकती है। यही वजह है कि रक्षा मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां पहले सामग्री की समीक्षा करती हैं।
एक और अहम पहलू कूटनीतिक प्रभाव डिप्लोमैटिक इंपैक्ट का है सीमा विवाद सैन्य टकराव या विदेशी देशों से जुड़े अनुभव।यदि सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं, तो वे अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। इन सभी कारणों से सैन्य संस्मरणों को प्रकाशित करने से पहले सरकारी मंजूरी और सुरक्षा जांच को आवश्यक माना जाता है।
Major Achievements of General M.M. Narvane ( जनरल एम.एम. नरवणे की प्रमुख उपलब्धियां) (Four Stars of Destiny)
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भारतीय सेना के उन वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल रहे हैं जिनका कार्यकाल कई असाधारण और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से भरा रहा। उन्होंने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक सेना प्रमुख के रूप में नेतृत्व किया जब भारत को एक साथ कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ा, उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी परीक्षा पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ चला उच्च तनाव वाला सीमा दौर था। गलवान घाटी संघर्ष के बाद उन्होंने सेना की रणनीति में संतुलित लेकिन सख्त रुख अपनाते हुए सीमाओं पर प्रभावी सैन्य तैयारी सुनिश्चित की।
जनरल नरवणे के कार्यकाल में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दिया गया, मेक इन इंडिया पहल के तहत स्वदेशी हथियार उपकरण और सैन्य प्लेटफार्म्स को बढ़ावा मिला, जिससे भारतीय सेना की विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। यह नीति दीर्घकालिक रक्षा क्षमता निर्माण के लिए अहम मानी जाती है।
उनके कार्यकाल की एक ऐतिहासिक उपलब्धि नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में महिलाओं के लिए प्रवेश की शुरुआत रही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस फैसले को लागू करने में सेना की भूमिका निर्णायक रही, जिसे सैन्य क्षेत्र में लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा परिवर्तन माना गया।
जनरल नरवणे को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM), विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) और सेना मेडल जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया, इसके अलावा उन्हें अंतरराष्ट्रीय और आयामी अनुभव भी प्राप्त रहा। उन्होंने श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के साथ ऑपरेशनल सेवा दी और म्यांमार में राजनयिक सैन्य पद पर कार्य किया।ये सभी अनुभव उन्हें एक दूरदर्शी और संतुलित सैन्य अधिकारी के रूप में स्थापित करते हैं।
Conclusion (Four Stars of Destiny)
जनरल एमएम नरवणे एक अनुभवी और सम्मानित पूर्व सेना प्रमुख रहे हैं जिनका कार्यकाल भारत की सुरक्षा दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण दौर में रहा। उनकी अप्रकाशित संस्मरण पुस्तक ” (Four Stars of Destiny) ” ने इसलिए चर्चा और विवाद दोनों पैदा किए हैं क्योंकि इसमें शीना, सीमा तनाव, सैन्य निर्णय प्रक्रिया और नीतिगत मुद्दों से जुड़े संवेदनशील उल्लेख बताए जाते हैं। संसद में इस किताब के कथित अंशों को लेकर उठे विवाद ने राष्ट्रीय सुरक्षा प्रकाशन नियमों और राजनीतिक जवाबदेही पर नई बहस। छेड़ दी है। आगे अंतिम स्थिति किताब के आधिकारिक प्रकाशन और समीक्षा के बाद ही स्पष्ट होगी।
Disclaimer(Four Stars of Destiny)
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और सामान्य जानकारी पर आधारित है। अप्रकाशित पुस्तक की सामग्री आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं है, लेख का उद्देश्य केवल सूचनात्मक है ना कि किसी पक्ष का समर्थन या विरोध करना राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर अंतिम सत्यापन आवश्यक है।