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Big Cricket News : वैभव सूर्यवंशी को Team India से दूर रख रहा है, ICC का ये नियम।

Big Cricket News : वैभव सूर्यवंशी ने 2026 अंडर 19 वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 175 रन की विस्फोटक और ऐतिहासिक पारी खेलकर क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी बल्लेबाजी में परिपक्वता, आक्रामक शॉट्स और दबाव में खेलने की क्षमता साफ दिखी। इतनी कम उम्र में बड़े मैच में ऐसा प्रदर्शन बहुत दुर्लभ माना जाता है।

Big Cricket News: Vaibhav Sooryavanshi scripted history with a sensational 175-run knock against England in the U19 World Cup 2026 final

 

सिर्फ 14 साल की उम्र में उन्होंने घरेलू यूथ और आईपीएल स्तर के रिकॉर्ड भी तोड़े हैं, जिससे वे भविष्य के बड़े स्टार माने जा रहे हैं, हालांकि ICC के न्यूनतम आयु नियम के कारण वे अभी सीनियर भारतीय टीम के लिए चयन के पात्र नहीं है।

अंडर 19 वर्ल्ड कप फाइनल का वह मुकाबला आज भी क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां वैभव सूर्यवंशी ने अपनी तूफानी बल्लेबाजी से सबको हैरान कर दिया, इंग्लैंड के खिलाफ निर्णायक मैच में उन्होंने सिर्फ अस्सी गेंदों पर एक सौ पचहत्तर रन बना डाले और खेल का पूरा रुख पलट दिया।यह केवल एक बड़ी पारी नहीं बल्कि रिकॉर्ड बुक में दर्ज होने वाला प्रदर्शन था। वैभव ने 15 छक्के लगाते हुए बेहद तेज स्ट्राइक रेट से रन बनाए और विरोधी टीम पर लगातार दबाव बनाए रखा। उनके आक्रामक अंदाज ने फाइनल को लगभग एक एकतरफा मुकाबला बना दिया।

बिहार के महज 14 वर्षीय इस प्रतिभाशाली बल्लेबाज को देखकर हर क्रिकेट प्रेमी के मन में यही जिज्ञासा उठती है। जब वैभव सूर्यवंशी इंग्लैंड के शीर्ष युवा गेंदबाजों पर इतना हावी हो सकता है और आईपीएल जैसे मंच पर भी शतक जमा चुका है, तो फिर वह अभी तक सीनियर भारतीय टीम का हिस्सा क्यों नहीं बना? इतनी कम उम्र में ऐसे प्रदर्शन के बाद चयन न होना लोगों को चौंकाता है। दरअसल इसके पीछे चयनकर्ताओं का फैसला नहीं बल्कि आईसीसी द्वारा तय न्यूनतम आयु से जुड़ा नियम सबसे बड़ी वजह है।

वैभव सूर्यवंशी अभी सीनियर टीम में क्यों नहीं खेल सकते? जानिए बड़ी वजह। (Big Cricket News)

वैभव सूर्यवंशी के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में तुरंत कदम रखने की राह में सबसे बड़ी बाधा उनकी प्रतिभा नहीं बल्कि आईसीसी का आयु से जुड़ा नियम है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने खिलाड़ियों की सुरक्षा और दीर्घकालीन करियर। को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम आयु सीमा तय कर रखी है। इस प्रावधान के अनुसार किसी भी खिलाड़ी को सीनियर अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले खेलने के लिए कम से कम 15 वर्ष का होना अनिवार्य है, यही वजह है कि शानदार प्रदर्शन और रिकॉर्ड तोड़ पारियों के बावजूद वैभव सूर्यवंशी अभी सीनियर स्तर पर चयन के दायरे में नहीं आते।

यही वजह है कि शानदार प्रदर्शन और रिकॉर्ड तोड़ पारियों के बावजूद वैभव अभी सीनियर स्तर पर चयन के दायरे में नहीं आते। यह नियम इसलिए बनाया गया ताकि कम उम्र के खिलाड़ियों पर अत्यधिक शारीरिक और मानसिक दबाव न पड़े और उनका विकास संतुलित तरीके से हो, विशेषज्ञों का मानना है कि सही उम्र पर डेब्यू करने से खिलाड़ी लंबा और स्थिर करियर बना पाते हैं।

वैभव का जन्म 27 मार्च 2011 को हुआ था, फरवरी 2026 में अंडर 19 वर्ल्ड कप जीतते समय। वह अभी भी तकनीकी रूप से 14 साल के ही हैं। इसका मतलब साफ है कि चाहे वह बिहार के लिए 36 गेंदों में शतक लगाए, चाहे आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दें, लेकिन सीनियर टीम में चयन 27 मार्च 2026 से पहले संभव नहीं।

यह स्थिति काफी दिलचस्प है कि वैभव सूर्यवंशी फिलहाल सीनियर अंतरराष्ट्रीय टीम के लिए उम्र सीमा के कारण पात्र नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर अंडर-19 स्तर पर भी उनकी वापसी का रास्ता लगभग बंद हो चुका है। उम्र और टूर्नामेंट पात्रता नियमों की वजह से वे बीच की स्थिति में आ गए हैं।यानी रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के बावजूद, उन्हें अगले स्तर पर पहुंचने के लिए अभी आधिकारिक पात्रता का इंतजार करना होगा।

BCCI ने जूनियर स्तर की प्रतियोगिताओं को संतुलित और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए अंडर -19 वर्ल्ड कप से जुड़ा एक सख्त प्रावधान लागू किया है। इस नियम के अनुसार कोई भी खिलाड़ी अंडर 19 विश्व कप में केवल एक ही बार हिस्सा ले सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर नए टूर्नामेंट में उभरते खिलाड़ियों को अवसर मिले और सीमित जगहों पर बार बार वही चेहरे कब्जा न जमाए रखें। बोर्ड चाहता है कि प्रतिभा का दायरा लगातार बढ़े और अलग-अलग बैच। के युवा क्रिकेटरों को अंतर्राष्ट्रीय मंच का अनुभव मिले। इस व्यवस्था से टीम चयन में विविधता बनी रहती है और आयु वर्ग टूर्नामेंट किसी एक खिलाड़ी के करियर का स्थायी पड़ाव नहीं बनता। इससे खिलाडिय़ों को समय पर अगले स्तर की ओर बढ़ने के लिए भी प्रोत्साहन मिलता है।

प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनने के बाद भी वैभव सूर्यवंशी दोबारा U-19 वर्ल्ड कप क्यों नहीं खेल सकते?

2026 अंडर-19 वर्ल्ड कप में प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट बनने के बाद भी वैभव सूर्यवंशी अगला अंडर-19 वर्ल्ड कप नहीं खेल पाएंगे। वजह यह है कि नियमों के मुताबिक कोई भी खिलाड़ी अंडर-19 वर्ल्ड कप में सिर्फ एक बार ही हिस्सा ले सकता है, ऐसे में भले ही 2028 या 2030 तक उनकी उम्र अंडर 19 श्रेणी में आती रहे , फिर भी वे दोबारा से इस टूर्नामेंट में उतरने के पात्र नहीं होंगे। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि हर संस्करण में नए खिलाड़ियों को मौका मिले और युवा स्तर पर प्रतिस्पर्धा संतुलित बनी रहे।

पिछले 12 महीनों में, वैभव सूर्यवंशी के रिकॉर्ड जिन्होंने सबको चौंकाया।

पिछले 12 महीनों में वैभव सूर्यवंशी ने जिस तरह के प्रदर्शन किए हैं, उन्होंने उन्हें केवल एक उभारता खिलाड़ी नहीं बल्कि भविष्य का बड़ा सितारा बना दिया है।इतनी कम उम्र में लगातार बड़े मंच पर रिकॉर्ड तोड़ पारियां खेलना ही उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया है। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता, आत्मविश्वास और मैच का रुख बदल देने की क्षमता साफ दिखाई देती है।

सबसे ज्यादा चर्चा उनके अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल की पारी की हुई, जहां उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ सिर्फ 80 गेंदों पर 175 रन ठोंक दिए। यह सिर्फ एक बड़ी पारी नहीं थी, बल्कि फाइनल जैसे दबाव वाले मुकाबले में पूरी तरह एकतरफा असर डालने वाला प्रदर्शन था। इसी टूर्नामेंट में उन्होंने कुल 30 छक्के लगाए जो वर्ल्ड कप इतिहास का नया रिकॉर्ड बन गया।

घरेलू और टी-20 क्रिकेट में भी उन्होंने कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए जिनमें सबसे कम उम्र में लिस्ट-A शतक, 35 गेंदों में आईपीएल शतक, भारत-A के लिए टी-20 सेंचुरी और यूथ क्रिकेट में सबसे तेज शतक जैसे कारनामे शामिल हैं। यही वजह है कि वैभव आज सबसे चर्चित युवा बल्लेबाजों में गिने जा रहे हैं।

संक्षेप

यह स्पष्ट है कि वैभव सूर्यवंशी का 2026 अंडर-19 वर्ल्ड कप में 175 रन की पारी ने उन्हें न सिर्फ भारत में बल्कि दुनियाभर में सुर्खियों में ला लिया है। 14 साल की उम्र में इंग्लैंड के खिलाफ सिर्फ अस्सी गेंदों में यह शानदार पारी खेलकर, उन्होंने टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे उच्च व्यक्तिगत स्कोर और छक्कों का रिकॉर्ड बनाया, जिसे भारत को बड़ी जीत भी मिली।

उनके प्रदर्शन को देशभर में सराहा जा रहा है और क्रिकेट समुदाय के दिग्गजों से लेकर प्रशंसकों तक उनकी तुलना महान खिलाड़ियों से की जा रही है, जिससे उनके भविष्य को लेकर उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।

कुल मिलाकर,  वैभव का यह रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन न केवल उनकी प्रतिभा की पहचान है, बल्कि युवक क्रिकेट के लिए प्रेरणा भी बन गया है और उनके भविष्य को लेकर क्रिकेट जगत में सकारात्मक चर्चा जारी है।

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