Border Security Force: पश्चिम बंगाल-असम चुनाव में ‘लाठी’ के साथ तैनात होगी ‘बीएसएफ’ असमंजस में हैं ‘सीमा सुरक्षा बल’ के जवान।

पश्चिम बंगाल और असम में आगामी विधानसभा चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की बड़ी तैनाती शुरू कर दी है। इसी बीच खबर सामने आई है कि चुनावी ड्यूटी के दौरान ‘सीमा सुरक्षा बल’ (BSF) के जवानों को हथियारों की जगह लाठी के साथ तैनात रहने का निर्देश दिया गया है। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में फिलहाल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की सैकड़ों कंपनियां तैनात की जा चुकी हैं। हालांकि, इस आदेश को लेकर कई अधिकारियों और जवानों में असमंजस है क्योंकि कुछ इलाके चुनाव के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं और पहले भी यहां हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं।

चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल और असम में BSF की तैनाती को लेकर चर्चा तेज।

 

Border Security Force : पश्चिम बंगाल और असम में निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा चुनाव कराने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जा रही है। फिलहाल पश्चिम बंगाल में सीएपीएफ की लगभग पाँच सौ कंपनियां तैनात कर दी गई हैं। सीमा सुरक्षा बलब ‘BSF’ के जवानों से कहा गया है कि वे चुनाव ड्यूटी के दौरान अपने हाथों में ‘लाठी’ रखें। सूत्रों के मुताबिक, बीएसएफ के डीजी ने यह हिदायत दी है।

नॉर्थ बंगाल के आईजी सहित कई अफसरों को यह आदेश ठीक नहीं लग रहा। इसके अलावा पीएसएफ जवान भी लाठी वाले आदेश से असमंजस में हैं। वजह पश्चिम बंगाल के 2021 के चुनाव में कई स्थानों पर हिंसा हुई थी। असम में भी कई ऐसे इलाके हैं जो विधानसभा चुनाव के लिहाज से अतिसंवेदनशील माने जाते हैं।

क्यों गले नहीं उतर लाठी के साथ ड्यूटी करने का आदेश।

बीएसएफ के डीजी प्रवीण कुमार ने पिछले दिनों गुवाहाटी, साउथ बंगाल और नाथ बंगाल के आईजी के साथ शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराने को लेकर बैठक की थी। उस बैठक में डीजी ने अफसरों को अवगत कराया कि इस बार चुनाव ड्यूटी के दौरान बीएसएफ जवान अपने पास ‘लाठी’ रखेंगे। हालांकि, बैठक में मौजूद बीएसएफ अफसरों को डीजी के आदेश पर हैरानी हुई। पश्चिम बंगाल और असम में कई इलाके संवेदनशील हैं, ऐसे में केवल ‘लाठी’ रखना क्या ये निर्णय जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। नार्थ बंगाल फ्रंटियर के आईजी ने इस आदेश को सही नहीं बताया। ये आदेश वहां मौजूद बीएसएफ के दूसरे अफसरों के गले भी नहीं उतर रहा है।

कोकराझार में बिना हथियार के ड्यूटी करने का आदेश।

बैठक में जिलों के अधिकारी भी मौजूद थे। बीएसएफ के डीजी के आदेश पर जहां कई अफसरों को हैरानी हुई, वहीं संबंधित जिले के SP ने इसका समर्थन किया। कोकराझार, जो पिछले दशक में उग्रवादी घटनाओं को लेकर अशांत क्षेत्रों में शामिल रहा है, के SP ने बिना हथियारों के और लाठी के साथ जवानों की तैनाती का आदेश जारी कर दिया। बीएसएफ के ग्राउंड अधिकारियों ने इस आदेश का समर्थन नहीं किया है। सूत्रों ने बताया कि ये आदेश बीएसएफ, जवानों और अफसरों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।

बीएसएफ अफसरों का कहना है कि पश्चिम बंगाल और असम के संवेदनशील इलाकों में चुनाव ड्यूटी बिना हथियार के कैसे संभव है?

मुख्य चुनाव आयुक्त ने मांगी 2021 में हुई हिंसा की रिपोर्ट।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इसी सप्ताह पश्चिम बंगाल का दौरा किया है। उन्होंने शांतिपूर्वक चुनाव कराने के मकसद से मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और डीजीपीयूष पांडेय के साथ बैठक की। मुख्य चुनाव आयुक्त ने वर्ष 2021 के चुनाव में किन किन क्षेत्रों में हिंसा की घटनाएं हुई थीं, इसका विस्तृत ब्यौरा मांगा है। उस दौरान कौन से अधिकारी चुनाव ड्यूटी पर थे?उनकी लिस्ट भी तलब की है। हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई हुई? यह जानकारी भी मांगी गई है।

निष्कर्ष।

पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव हमेशा संवेदनशील माने जाते हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हर फैसला अहम हो जाता है। बीएसएफ जवानों को लाठी के साथ तैनात करने का निर्णय चुनाव को शांतिपूर्ण और मतदाताओं के लिए सहज बनाने के उद्देश्य लिया गया बताया जा रहा है। हालांकि, कुछ जवानों और अधिकारियों के बीच इस आदेश को लेकर असमंजस भी देखने को मिल रहा है, क्योंकि कई क्षेत्रों में पहले चुनावी हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती होगी कि सुरक्षा बलों की सुरक्षा बनाए रखते हुए मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष और बिना किसी जारी दबाव के सफलतापूर्वक संपन्न कराया जाए।

Border Security Force: पश्चिम बंगाल-असम चुनाव में ‘लाठी’ के साथ तैनात होगी ‘बीएसएफ’ असमंजस में हैं ‘सीमा सुरक्षा बल’ के जवान।

“अस्वीकरण”

यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है। इसमें दी गई जानकारी समय के साथ बदल सकती है, इसलिए पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोतों या संबंधित अधिकारियों से पुष्टि अवश्य करें।

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