Lok Adalat Date Re-scheduled: 14 मार्च को नहीं लगेगी लोक अदालत तारीख में हुआ बदलाव।

Lok Adalat Date Re-scheduled: लोक अदालत भारत की न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मंच है। जिसका उद्देश्य आपसी सहमति के आधार पर विवादों का त्वरित, सरल और कम खर्च में समाधान करना है। यहां लंबित और प्री लिटिगेशन मामलों का निपटान सौहार्दपूर्ण तरीके से किया जाता है। इसकी प्रक्रिया अनौपचारिक और जनहितकारी होती है, जिससे न्याय तक आम लोगों की पहुंच आसान बनती है तथा अदालतों पर बढ़ते बोझ को कम करने में भी मदद मिलती है।

लोक अदालत अपडेट: 14 मार्च को नहीं लगेगी अदालत, तारीख में बदलाव।

 

Lok Adalat Date Re-scheduled: नेशनल लोक अदालत का आयोजन 14 मार्च 2026 को होने वाला था लेकिन अब 14 मार्च की जगह इसकी नई तिथि का ऐलान किया गया है। दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (DSLSA) ने नई तारीख का ऐलान कर भी दिया है। अब लोक अदालत का आयोजन 22 मार्च 2026 को किया जाएगा। लोक अदालत का आयोजन कहां होगा और यहां किन मामलों का निपटारा किया जाता है। आइए इसके बारे में समझते हैं।

दिल्ली में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 14 मार्च 2026 दिन शनिवार को होना तय हुआ था, लेकिन अब इसकी तारीख में बदलाव कर दिया गया है। लोक अदालत को Postponed करते हुए दिल्ली राज्य विधिक प्राधिकरण (DSLSA) ने नई तारीख का ऐलान किया है।

लोक अदालत लोगों के लिए अपने लंबे समय से लंबित पुराने ट्रैफिक चालानों का निपटारा कराने का अच्छा अवसर होता है। इस दिन लोग अपने पुराने चालानों को कम जुर्माने के साथ सेटल करा सकते हैं या माफ करवा सकते हैं।

Lok Adalat Date Re-scheduled किस दिन होगा लोक अदालत का आयोजन?

दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (DSLSA) ने एक नोटिस जारी किया है। जिसमें बताया गया है कि 14 मार्च 2026 को लगने वाली लोक अदालत का आयोजन 22 मार्च 2026 को किया जाएगा। जिसके नोटिस की कॉपी आप देख सकते हैं।

Delhi Lok Adalat Date Re-Scheduled – Check the New Hearing Schedule

 

Lok Adalat Date Re-scheduled, कहां कहां लगेगी लोक अदालत। 

उपरोक्त लोक अदालतों का आयोजन दिल्ली के सभी जिला न्यायालयों जैसे तीस हजारी, कड़कड़डूमा, पटियाला हाउस, रोहिणी, साकेत, द्वारका और राउस एवेन्यू में किया जाएग। अगर आपका भी कोई पुराना चालान पेंडिंग है तो आप भी 22 मार्च को इन कोर्ट में जाकर उसका निपटारा करा सकते हैं।

Lok Adalat Date Re-scheduled किन किन मामलों का निपटारा लोक अदालत में नहीं होता?

National legal services authority के अनुसार लोक अदालत में केवल समझौते योग्य (Compoundable/Civil Nature) मामलों का निपटारा होता है। बड़े आपराधिक मामलों का निपटारा लोक अदालत में नहीं होता।आइए देखते हैं किन -किन केसों का निपटारा लोक अदालत में नहीं हो पाता:

  1. गंभीर आपराधिक मामले जैसे (हत्या या बलात्कार)
  2. गैर समझौता योग्य अपराध।
  3. देशद्रोही आतंकवाद से जुड़े मामले।
  4. NDPS एक्ट (ड्रग्स तस्करी) के गंभीर मामले।
  5. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के केस।
  6. घरेलू हिंसा के गंभीर दंडनीय प्रकरण (जहां समझौता संभव न हो)
  7. दहेज हत्या के मामले।
  8. नाबालिग से जुड़े गंभीर अपराध (POCSO Case)
  9. साइबर क्राइम के गंभीर आर्थिक अपराध।
  10. बैंक धोखाधड़ी या बड़े वित्तीय घोटाले।
  11. जमीन, कब्जा या टाइटल विवाद यहां समझौता न हो।
  12. वसीयत (Will) की वैधता पर जटिल विवाद।
  13. संविधान की व्याख्या से जुड़े मामले।
  14. चुनाव याचिकाएं (Election Petitions)
  15. सर्विस मैटर ( सरकारी नौकरी भर्ती/ बर्खास्तगी विवाद)
  16. टैक्स चोरी या गंभीर कर विवाद।
  17. कंपनी कानून के जटिल कॉरपोरेट विवाद।
  18. दिवालियापन के जटिल मामले।
  19. पर्यावरण कानून के बड़े सार्वजनिक हित मामले।
  20. मानहान के गंभीर आपराधिक मामले।
  21. पुलिस कस्टडी या मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर केस।
  22. फर्जी दस्तावेज/ जालसाजी के बड़े आपराधिक मामले।
  23. सीमा /अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े विवाद।
  24. जहां किसी पक्ष की सहमति न हो।
  25. ऐसे मामले जिनमें कानूनी अधिकारों का निर्धारण जरूरी हो, समझौता नहीं।

ध्यान रखें, लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य समझौते से त्वरित निपटारा है, इसलिए केस वही मामले के लिए जाते हैं जिनमें दोनों पक्ष राजी हो और कानून इसकी अनुमति देता हो।

Lok Adalat Date Re-scheduled, लोक अदालत में किन किन मामलों का होगा निपटारा।

नेशनल लोक अदालत में सिर्फ छोटे मामले ही सेटलिया, माफ किए जाते हैं, बड़े आपराधिक मामलों का निपटारा लोक अदालत में नहीं होता। लोक अदालत में हेलमेट या सीट बेल्ट न पहनना, ओवर स्पीडिंग,  रेल लाइट जंप करना, गलत जगह गाड़ी पार करना, बिना PUC सर्टिफिकेट की गाड़ी चलाना, नंबर प्लेट न होना, वैद्य, ड्राइविंग लाइसेंस न होना या ट्रैफिक साइन को नजरअंदाज करना जैसे मामले निपटाए जाते हैं। शराब पीकर गाड़ी चलाना, फिट एंड रन या गंभीर सड़क हादसे जैसे बड़े आपराधिक मामले लोक अदालत में सेटल नहीं किए जाते।

लोक अदालत में जाने से पहले करना होगा रजिस्ट्रेशन।

लोक अदालत में अपने चालान का निपटारा करवाना चाहते हैं तो आपको पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा बिना रजिस्ट्रेशन के लोक अदालत में मामले की सुनवाई नहीं होगी। इसके लिए सबसे पहले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस या परिवहन पोर्टल पर अपने वाहन का नंबर डालकर चेक करें कि कौन सा चालान पेंडिंग है। रजिस्ट्रेशन करने के लिए अब नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं।

  • ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की वेबसाइट पर जाएं।
  • होम पेज पर लोक अदालत रजिस्ट्रेशन ऑप्शन पर क्लिक करो।
  • इसके बाद मांगी जाने वाली सभी डिटेल्स भरें और फॉर्म को सबमिट कर दें।
  • इसके बाद आपको एक टोकन नंबर और अपॉइंटमेंट लेटर मिलेगा। उसे डाउनलोड कर लें।
  • लोक अदालत वाले दिन इसी अपॉइंटमेंट लेटर के साथ सभी जरूरी डाक्यूमेंट्स जैसे गाड़ी की आरसी ड्राइविंग लाइसेंस, बीमा , प्रदूषण सर्टिफिकेट लेकर कोर्ट पहुंचे।
  • वहां जज आपके मामले की सुनवाई करेंगे और मामले का निपटारा करेंगे।

निष्कर्ष

Lok Adalat न्याय व्यवस्था का एक प्रभावी और जनहितकारी माध्यम है,  जिसका उद्देश्य आपसी सहमति से विवादों का त्वरित और कम खर्च में समाधान करना है। इसमें लंबित या प्री लिटिगेशन मामलों का निपटान सरल प्रक्रिया से किया जाता है, जिससे अदालतों का बोझ भी कम होता है।यहां निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होते हैं तथा अपील की आवश्यकता नहीं रहती। लोक अदालत सामाजिक सद्भाव, न्याय तक आसान पहुंच और धन और समय की बचत सुनिश्चित करती है।इस प्रकार, यह न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ, पारदर्शी और मानवीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

महत्वपूर्ण प्रश्न।

01. लोक अदालत क्या है?

उत्तर. लोक अदालत एक वैकल्पिक विवाद निपटान मंच है जहां आपसी समझौते से मामलों का जल्दी और कम खर्च में समाधान किया जाता है।

02. लोक अदालत का आयोजन कौन करता है?

उत्तर. इसका आयोजन मुख्य रूप से नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) तथा राज्य /जिला विधिक सेवा प्राधिकरण करते हैं।

03. किन मामलों का निपटान लोक अदालत में होता है?

उत्तर. सिविल मामले मोटर दुर्घटना क्लेम बैंक रिकवरी, पारिवारिक विवाद और छोटे आपराधिक मामले समझौता योग्य।

04. क्या लोक अदालत का फैसला अंतिम होता है।

उत्तर. हां, इसका निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता है तथा सामान्यतः इसके खिलाफ अपील नहीं होती।

05. लोक अदालत के क्या लाभ हैं?

उत्तर. समय पर पैसे की बचत, सरल प्रक्रिया, जल्दी निपटान और अदालतों के लंबित मामलों में कमी।

“अस्वीकरण”

यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई , इसे अंतिम कानूनी या आधिकारिक सलाह नहीं माना जाना चाहिए। नियम एवं प्रक्रियाएं समय -समय पर बदल सकती हैं। इसलिए नवीन जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोत अवश्य देखें। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।

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