Nuclear Emergency को लेकर खाड़ी देशों की तैयारी तेज, 1 करोड़ Capsule के लिए चंडीगढ़ कंपनी से संपर्क।

Nuclear Emergency: खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यहां कई ऐसे देश स्थित हैं जिनकी राजनीति, सुरक्षा और ऊर्जा संसाधन वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

खाड़ी देशों ने Nuclear Emergency के लिए 1 करोड़ Capsule के सप्लाई संबंधी जानकारी चंडीगढ़ की कंपनी से मांगी।

 

हाल ही के वर्षों में, बढ़ते सैन्य तनाव, परमाणु कार्यक्रमों और क्षेत्रीय संघर्षों ने न्यूक्लियर इमरजेंसी (Nuclear Emergency) की आशंका को भी चर्चा का विषय बना दिया है, अगर किसी भी कारण से परमाणु दुर्घटना, हमला या रेडिएशन से जुड़ी आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसका प्रभाव केवल एक देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र और विश्व पर पड़ सकता है।

खाड़ी देशों ने ऐसे संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए कई सुरक्षा उपाय और आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित किए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, रेडिएशन के खतरे को कम करना और संकट की स्थिति में तेजी से राहत और बचाव कार्य करना है।

अमेरिका, ईरान तनाव के बीच खाड़ी देशों ने संभावित न्यूक्लियर इमरजेंसी से निपटने की तैयारी तेज कर दी है। बहरीन स्थित एक फार्मा लाइजनिंग एजेंट ने चंडीगढ़ की एक दवा कंपनी से संपर्क कर परमाणु आपदा में इस्तेमाल होने वाले प्रसियन ब्लू कैप्सूल्स के बारे में जानकारी मांगी है।

एजेंट ने कंपनी से पूछा है कि क्या वह 1 करोड़ कैप्सूल उपलब्ध करवाने में सक्षम है, साथ ही, अलग अलग आयु वर्ग की आबादी के लिए इसकी कितनी डोज दी जाती है और उत्पादन की क्षमता क्या है जैसे कई सवाल भी पूछे गए हैं।

कंपनी की डायरेक्टर डॉ॰ बैशाली अग्रवाल के अनुसार, इस विषय पर बातचीत जारी है।फिलहाल एजेंट अपने देश के स्वास्थ्य मंत्रालय से इस बारे में चर्चा कर रहा है।अगर समझौता अंतिम रूप लेता है तो इन दवाओं की सप्लाई बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन जैसे खाड़ी देशों में की जा सकती है।

कंपनी का मुख्यालय चंडीगढ़ में है जबकि इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हिमाचल प्रदेश के बद्दी में स्थित है।इससे पहले जून 2025 में इजराइल ईरान तनाव के दौरान भी इस दवा की मांग सामने आई थी, लेकिन 12 दिन में संघर्ष खत्म होने के बाद बातचीत आगे नहीं बढ़ी थी।

Prussian blue क्या है? जानिए रेडिएशन से बचाव में इसकी भूमिका ।

Prussian Blue ( प्रशियन ब्लू) एक विशेष दवा है जिसका उपयोग मुख्य रूप से रेडियोधर्मी तत्वों और जहरीली धातुओं के प्रभाव को कम करने के लिए किया जाता है। खासतौर पर यह शरीर में प्रवेश कर चुके सीजियम (Cesium) और थैलियम (Thallium) जैसे खतरनाक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है। न्यूक्लियर या रेडिएशन से जुड़ी आपात स्थितियों में यह दवा काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

प्रशियन ब्लू का काम करने का तरीका काफी अनोखा है। जब कोई व्यक्ति इस दवा को खाता है, तो यह आंतों में जाकर रेडियोधर्मीकरणों या जहरीली धातुओं को अपने साथ बांध (Bind) लेती है। इसके बाद ये हानिकारक शरीर में वापस अवशोषित नहीं हो पाते और मन के जरिये शरीर से बाहर निकल जाते हैं। इससे शरीर में रेडिएशन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है।

डॉ। आमतौर पर इसे कैप्सूल के रूप में देते हैं और कई दिनों तक नियमित रूप से लेना पड़ता है। इस प्रक्रिया से शरीर में मौजूद खतरनाक पदार्थों का स्तर घटता है और व्यक्ति को गंभीर स्वास्थ्य नुकसान से बचाने में मदद मिलती है।इसलिए न्यूक्लियर दुर्घटना या रेडियोधर्मी प्रदूषण की स्थिति में प्रसियन ब्लू को एक महत्वपूर्ण उपचार माना जाता है।

पोटेशियम आयोडाइड की भी मांग की गई है, पोटैशियम आयोटाइज़्ड क्या है और यह कैसे काम करता है?

Potassium Iodide (पोटेशियम आयोडाइड) एक महत्वपूर्ण दवा है जिसका उपयोग विशेष रूप से न्यूक्लियर या रेडिएशन आपात स्थिति में किया जाता है। यह दवा शरीर के थायराइड ग्रंथि ( Thyroid Gland) को रेडियोकर्मी आयोडिन के नुकसान से बचाने में मदद करती है।

जब किसी परमाणु दुर्घटना या रेडिएशन रिसाव की घटना होती है, तो वातावरण में रेडियोधर्मी आयोडीन (Radioactive Iodine) फैल सकता है। यदि शरीर में प्रवेश कर जाता है, तो थायराइड ग्रन्थ ही इसे अवशोषित कर लेती है, जिससे भविष्य में थायराइड कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

ऐसी स्थिति में, पोटैशियम आयोडाइड लेने से थायराइड पहले से ही सामान्य ( गैर -रेडियो धर्मी) आयोडियन से भर जाता है। इससे रेडियोभर में आयोडीन को थायराइड में प्रवेश करने का मौका नहीं मिलता और वह शरीर से बाहर निकल जाता है।

इसी कारण न्यूक्लियर आपदा या रेडिएशन खतरे के समय सरकारें और स्वास्थ्य एजेंसियां पोटेशियम आयोडाइड टैबलेट लोगों को देने की व्यवस्था करती हैं, हालांकि इस दवा को केवल डॉक्टर या सरकारी स्वास्थ्य निर्देशों के अनुसार ही लेना चाहिए क्योंकि बिना जरूरत के इसका सेवन करना सुरक्षित नहीं माना जाता।

पोटेशियम आयोडाइड का उपयोग न्यूक्लियर इमरजेंसी में थायराइड ग्रंथि को रेडिएशन से बचाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल “Hyperthyroidism”  के इलाज और फेफड़ों में जमा बलगम को ढीला करने में भी किया जाता है।

Nuclear Emergency को लेकर खाड़ी देशों की तैयारी तेज, 1 करोड़ Capsule के लिए चंडीगढ़ कंपनी से संपर्क।

“अस्वीकरण”

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है।इसमें दी गई स्वास्थ्य या चिकित्सा संबंधी जानकारी किसी भी प्रकार की पेशेवर चिकित्सा निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी दवा उपचार या स्वास्थ्य समस्या के संबंध में निर्णय लेने से पहले हमेशा योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें। लेख में दी गई जानकारी की सटीकता और पूर्णता बनाए रखने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी भी त्रुटि बदलाव के लिए लेखक के साथ जिम्मेदार जिम्मेदारी नहीं होगी।

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