Old Tax Regime Benefits: ओल्ड टैक्स रिजीम में मिलेगी बंपर टैक्स छूट! नए ड्राफ्ट नियमों से होगी तगड़ी सेविंग, अब जेब में बचेगा ज्यादा पैसा।

Old Tax Regime Benefits : साल 2026 के ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, सरकार ओल्ड टैक्स रिजीम में मिलने वाली छूट (Exemptions) और भत्तों (Allowances) की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो वेतन भोगी और निवेश करने वाले करदाताओं को सीधा लाभ मिल सकता है।

Old Tax Regime 2026 update: More exemptions, smarter tax planning, and better savings for salaried employees.

 

छूट में बढ़ी हुई लिमिट से आपकी टैक्सेबल इनकम कम होगी, जिससे कुल टैक्स देनदारी घट सकती है। खासतौर पर HRA, स्टैंडर्ड डिडक्शन और अन्य निवेश आधारित छूट लेने वालों के लिए यह राहत भरी खबर है। इससे मिडिल क्लास टैक्स पेयर्स को अधिक बचत का अवसर मिलेगा, और वित्तीय योजना बनाना भी आसान होगा।

अगर आप टैक्स बचत के लिए निवेश का रास्ता चुनते हैं, और अभी भी ओल्ड टैक्स रिजीम को प्राथमिकता देते हैं, तो आपके लिए राहत भरी खबर है। साल 2026 के ड्राफ्ट नियमों में सरकार ने ऐसे बदलावों का प्रस्ताव रखा है , जो पुराने टैक्स सिस्टम को अपनाने वालों को पहले से अधिक फायदा पहुंचा सकते हैं।

इन प्रस्तावित संशोधनों का मुख्य उद्देश्य मिडिल क्लास और सैलरीड वर्ग को अतिरिक्त कर राहत देना है। खास तौर पर वे लोग जो इंश्योरेंस पॉलिसी, प्रोविडेंट फंड (PF), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और होम लोन पर ब्याज जैसी योजनाओं में निवेश करते हैं, उन्हें ज्यादा लाभ मिल सकता है।

सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि टैक्सपेयर्स को निवेश के जरिए बचत का बेहतर अवसर मिले और उनकी टैक्सेबल इनकम कम हो सके। अगर ये नियम लागू होते हैं तो ओल्ड टैक्स रिजीम चुनना कई लोगों के लिए पहले से ज्यादा फायदेमंद विकल्प बन सकता है।

ओल्ड टैक्स रिजीम में छूट नियमों पर सरकार की नई तैयारी। 

हालांकि, पिछले कुछ समय से नए टैक्स सिस्टम पर जोर दिया जा रहा था, अब पुराने टैक्स सिस्टम (Old Tax Regime) को भी और बेहतर बनाने की तैयारी है। सरकार ने Income tax rules, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें कई ऐसे बदलावों का प्रस्ताव है जो टैक्स रिजीम को फिर से फायदेमंद बना सकते हैं।

सबसे बड़ा बदलाव हाउस रेंट अलाउंस (HRA) से जुड़ा है। अब तक सिर्फ मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में 50% तक HRA में छूट मिलती थी, लेकिन ड्राफ्ट नियमों में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे तेजी से बढ़ते शहरी केंद्रों को भी इसी कैटेगरी में शामिल करने का प्रस्ताव है, जिससे इन शहरों में रहने वाले करदाताओं को भी लाभ मिल सकता है।

इसके अलावा चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस को ₹100 प्रति माह से बढ़ाकर ₹3000 और हॉस्टल अलाउंस को ₹3000 से ₹9000 प्रतिमाह करने का प्रस्ताव है। भोजन बाउचर (Food Meal Vouchers) की छूट भी बढ़ाने का सुझाव है, जो अब ₹50 प्रति भोजन से बढ़ाकर ₹200 तक हो सकती है। जिससे कर्मचारियों को और बचत का मौका मिलेगा।

इन छोटे छोटे संशोधनों से आपकी सालाना टैक्सेबल इनकम में कटौती बढ़ सकती है और टैक्स का बोझ कम हो सकता है। खासतौर पर वेतनभोगी और मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स के लिए यह उपाय राहत देने वाला साबित हो सकता है, जिससे निवेश आधारित बचत और अलाउंसेस का सही फायदा उठाया जा सके।

मेट्रो सिटी में रहने वालों के लिए HRA में संभावित राहत मिल सकती है।

सबसे अहम और राहत देने वाला प्रस्ताव हाउस रेंट अलाउंस (HRA) से जुड़ा है। अभी तक केवल Delhi, Mumbai, Kolkata और Chennai जैसे मेट्रो शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को ही बेसिक सैलरी का अधिकतम 50% तक HRA छूट का लाभ मिलता था। अन्य शहरों में यह सीमा 40% तक सीमित रहती थी, जिससे टैक्सेबल इनकम अपेक्षाकृत ज्यादा बनती थी।

अब 2026 के ड्राफ्ट नियमों में, Bengaluru, Hyderabad,  Pune और Ahmedabad जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों को भी मेट्रो की श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव है। इन शहरों में किराया और जीवन यापन की लागत पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है, इसलिए यह बदलाव  लाखों सैलरीड कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इन शहरों में रहने वाले कर्मचारी भी बेसिक सैलरी का 50% तक HRA छूट का दावा कर सकेंगे। इससे उनकी टैक्स फ्री इनकम बढ़ेगी और कुल टैक्स देनदारी में कमी आएगी। खासकर आईटी, कारपोरेट और सर्विस सेक्टर में काम करने वाले युवाओं और मिडिल क्लास परिवारों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है। कुल मिलाकर, यह कदम ओल्ड टैक्स रिजीम को फिर से आकर्षक बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

बच्चों की शिक्षा और हॉस्टल खर्च पर मिल सकती है, अतिरिक्त छूट।

सरकार ने वेतनभोगी पेरेंट्स को राहत देने के लिए बच्चों की पढ़ाई से जुड़े अलाउंस में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। अब तक, चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस के तहत केवल ₹1,00 रुपये प्रति माह की टैक्स छूट मिलती थी, जो मौजूदा महंगाई और बढ़ती स्कूल फीस के मुकाबले बेहद कम थी। 2026 के ड्राफ्ट नियमों में इसे बढ़ाकर ₹3,000 रुपये प्रति माह करने की तैयारी है जिससे माता-पिता को वास्तविक राहत मिल सके।

इसी तरह, हॉस्टल खर्च पर मिलने वाली टैक्स छूट भी लंबे समय से अपर्याप्त मानी जा रही थी। पहले यह सीमा 3,000 रुपये प्रति माह थी, लेकिन प्रस्ताव है कि इसे बढ़ाकर ₹9,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया जाए। आज के दौर में बड़े शहरों में हॉस्टल फीस, मेस चार्ज और अन्य खर्च काफी बढ़ चुके हैं, ऐसे में यह संशोधन समय की जरूरत माना जा रहा है।

यदि ये बदलाव लागू होते हैं, तो कामकाजी माता- पिता की टैक्सेबल इनकम कम हो सकती है और सालाना बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। खासकर उन परिवारों के लिए, यह राहत महत्वपूर्ण होगी जिसके बच्चे दूसरे शहरों में पढ़ाई कर रहे हैं। कुल मिलाकर, यह कदम शिक्षा से जुड़े बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने और मिडिल क्लास परिवारों को वित्तीय सहारा देने की दिशा में सकारात्मक पहल माना जा सकता है।

कंपनी से मिलने वाले गिफ्ट्स पर नहीं लगेगा टैक्स।

त्योहारों या ऑफिस प्रोग्राम्स में कंपनी की तरफ से मिलने वाले गिफ्ट्स और वाउचर्स को लेकर भी अच्छी खबर है, ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, अब हर साल कंपनी से मिलने वाले ₹15,000 रुपये तक के गिफ्ट्स पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, पहले यह लिमिट सिर्फ ₹5,000 रुपए सालाना थी। इस बदलाव से कर्मचारियों को ऑफिस की तरफ से मिलने वाले रिवार्ड एवं फेस्टिवल गिफ्ट्स का पूरा फायदा मिल सकेगा और उन्हें टैक्स कटने की टेंशन नहीं रहेगी।

ऑफिस के खाने पर भी मिलेगी ज्यादा छूट।

काम के दौरान ऑफिस में मिलने वाले मुफ्त खाने या मील कूपन पर भी टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है, अब हर मील के लिए टैक्स फ्री लिमिट ₹2,00 रुपये तक की जा सकती है यह कदम मौजूदा में बाहर मिलने वाले खाने की कीमतों को ध्यान में रखकर उठाया गया है, इसे सैलरीड लोगों को मिलने वाली छोटी-छोटी सुविधाएं भी टैक्स के दायरे से बाहर रहेंगी और उनकी कुल बचत में इजाफा होगा।

PAN कार्ड को लेकर नियम होंगे सख्त।

सैलरी में राहत देने के साथ-साथ सरकार बड़े लेन-देन पर निगरानी भी बढ़ाने जा रही है, नए ड्राफ्ट नियमों के तहत अब कई बड़े कामों के लिए पैन (PAN) कार्ड देना जरूरी हो जाएगा, अगर आप साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा कैश जमा करते हैं या निकालते हैं, तो पैन कार्ड अनिवार्य होगा। इसी तरह पाँच लाख रुपये से ऊपर की गाड़ी खरीदने, 1 एक लाख रुपए से ज्यादा होटल या इवेंट पर खर्च करने और इंश्योरेंस अकाउंट खोलने के लिए भी पैन कार्ड देना होगा। इसके अलावा प्रॉपर्टी डील के लिए पैन कार्ड की लिमिट को बढ़ाकर 20 लाख रुपए किया जा सकता है।

कम होगा आपका टैक्स और बढ़ेगी सेविंग।

इन प्रस्तावित नियमों का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आपकी टैक्सेबल इनकम कम हो जाएगी, जिससे सीधे तौर पर आपका टैक्स बिल छोटा हो जाएगा, ड्राफ्ट रूल्स में उन प्रावधानों को आसान बनाने की बात कही गई है जो अब तक काफी पेचीदा माने जाते थे। अगर आप होम लोन का ब्याज भर रहे हैं या बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर रहे हैं, तो 2026 के ये नए नियम आपको पहले के मुकाबले ज्यादा टैक्स रिफंड दिलाने में मदद कर सकते हैं।

“अस्वीकरण”

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी, ड्राफ्ट नियमों और उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं पर आधारित है, जो समय के साथ बदल सकती है। अंतिम कर निर्णय लेने से पहले आधिकारिक अधिसूचना या आयकर विभाग की वेबसाइट अवश्य देखें। किसी भी वित्तीय या टैक्स संबंधी निर्णय के लिए अपने टैक्स सलाहकार या चार्टर्ड अकाउंटेंट से परामर्श करना उचित रहेगा।

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