Prime Minister’s Office (PMO): केंद्र सरकार के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित कर दिया गया है। आज़ादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय का पता बदला गया है, जिसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। साउथ ब्लॉक कई दशकों से देश के प्रशासनिक ढांचे का प्रमुख केंद्र रहा है। अब नई और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित ‘सेवा तीर्थ’ भवन में पीएमओ का संचालन किया जाएगा। यह बदलाव प्रशासनिक कार्यों को अधिक कुशल और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
यह कदम सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत किया जा गया है और आज़ादी के बाद पीएमओ के पते में यह पहला बदलाव है। ‘सेवा तीर्थ’ भवन आधुनिक सुविधाओं और अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जो प्रशासनिक कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगा। साउथ ब्लॉक लंबे समय तक देश के प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। इस शिफ्ट से पीएमओ का संचालन अधिक सुव्यवस्थित और आधुनिक रूप में होगा।
नया भवन, ‘सेवा तीर्थ’, रायसीना हिल पर साउथ ब्लॉक से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है। इसे आधुनिक प्रशासनिक सुविधाओं और तकनीकी उपकरणों से लैस किया गया है। इस शिफ्ट के साथ पीएमओ का संचालन अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी तरीके से हो रहा है। साउथ ब्लॉक में दशकों से चल रहे प्रशासनिक कामकाज का यह एक ऐतिहासिक समापन होगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अब सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बने एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव-I के तीन भवनों में से ‘सेवा तीर्थ-1’ से संचालन करेगा। यह नया भवन वायु भवन के बगल में स्थित है और आधुनिक प्रशासनिक सुविधाओं से लैस है। ‘सेवा तीर्थ-1’ पीएमओ की सभी कार्यात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक, सुरक्षित कार्यक्षेत्र और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था शामिल हैं।
‘सेवा तीर्थ-2’ में कैबिनेट सचिवालय स्थित है, जो पहले राष्ट्रपति भवन से स्थानांतरित किया जा चुका है। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का कार्यालय सरदार पटेल भवन से ‘सेवा तीर्थ-3’ में शिफ्ट हुआ है। ये बदलाव सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत किए गए हैं और नए परिसर में आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रशासनिक ढांचे के साथ प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने का उद्देश्य है।
इस नए परिसर में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (National Security Council Secretariat) और एक कॉन्फ्रेंस हॉल भी स्थित है। इसके साथ ही ‘इंडिया हाउस’ नामक नया भवन उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों (high-level delegations) को आमंत्रित करने और कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सुविधा का हिस्सा है। यह पूरी संरचना आधुनिक प्रशासनिक और सुरक्षा मानकों के अनुरूप डिज़ाइन की गई है, जिससे प्रधानमंत्री कार्यालय और संबंधित विभागों के कार्यकुशल संचालन में आसानी होगी।
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इस परिसर को पहले सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ के नाम से जाना जाता था। यह दिल्ली में प्रशासनिक और सरकारी कार्यों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया क्षेत्र है। नए पुनर्विकसित परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और अन्य प्रशासनिक विभागों के आधुनिक कार्यालय शामिल हैं।
साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण 1931 में हुआ था। अधिकारियों के अनुसार, पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में पहली कैबिनेट बैठक साउथ ब्लॉक में आयोजित की गई थी। ये भवन दशकों तक भारत के प्रशासनिक और राजनीतिक कार्यों का केंद्र रहे हैं और अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय और कई महत्वपूर्ण सरकारी विभागों के संचालन का मुख्य स्थान रहे हैं।
साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण 1931 में हुआ था। अधिकारियों के अनुसार, पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में पहली कैबिनेट बैठक साउथ ब्लॉक में आयोजित की गई थी। ये भवन दशकों तक भारत के प्रशासनिक और राजनीतिक कार्यों का केंद्र रहे हैं और अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय और कई महत्वपूर्ण सरकारी विभागों के संचालन का मुख्य स्थान रहे हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के साउथ ब्लॉक से स्थानांतरित होने के बाद आने वाले हफ्तों में रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय भी साउथ ब्लॉक से बाहर स्थानांतरित हो जाएंगे। वहीं, नॉर्थ ब्लॉक पहले ही खाली कर दिया गया है और वहां स्थित मंत्रालयों को नए भवनों में स्थानांतरित किया जा चुका है। ये नए भवन कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) के किनारे बनाए गए हैं, जो आधुनिक प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप डिज़ाइन किए गए हैं।
सरकार ने कहा है कि इस शिफ्ट के साथ देश के प्रशासनिक केंद्र का रायसीना हिल से बाहर जाना शुरू हो गया है। यह कदम प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। नए परिसर में सुरक्षा, तकनीकी सुविधाओं और कार्यकुशलता को ध्यान में रखते हुए आधुनिक कार्यालय बनाए गए हैं।
इस बदलाव से केवल प्रधानमंत्री कार्यालय ही नहीं बल्कि अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों का संचालन भी नए भवनों से किया जाएगा, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और तेजी आएगी। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत यह कदम देश के प्रशासनिक ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
Prime Minister’s Office (PMO), North & South Block: ऐतिहासिक भवनों का संरक्षण और प्रशासनिक बदलाव।
Prime Minister’s Office (PMO): सरकार ने ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा है कि नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक को अब ‘युग युगीन भारत संग्रहालय’ में परिवर्तित किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य पुराने प्रशासनिक भवनों को केवल प्रशासनिक केंद्र के रूप में नहीं बल्कि भारत की समृद्ध संस्कृति और इतिहास को प्रदर्शित करने वाले सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित करना है।
इस संग्रहालय के निर्माण और विकास के लिए राष्ट्रीय संग्रहालय और फ्रांस म्यूज़ियम डेवलपमेंट के बीच एक समझौता किया गया है। नए संग्रहालय में भारत की प्राचीन और आधुनिक सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा, जिसमें कला, स्थापत्य, ऐतिहासिक दस्तावेज और समकालीन जीवन का परिचय शामिल होगा।
संग्रहालय का उद्देश्य केवल प्रदर्शनी ही नहीं, बल्कि जनता के लिए शिक्षा और सांस्कृतिक अनुभव भी प्रदान करना है। भविष्य में यह जगह देश और विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। इस परिवर्तन के साथ ही नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का ऐतिहासिक महत्व और उनका वास्तुशिल्प संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा। यह कदम भारत की सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक और सुलभ रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
Prime Minister’s Office (PMO) और मंत्रालयों के शिफ्ट पर सरकार की राय।
हाल ही में नए प्रशासनिक भवनों का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों तक शासन व्यवस्था उपनिवेश कालीन भवनों से संचालित होती रही, जिनमें जगह और अवसंरचना की सीमाएँ थीं। उन्होंने बताया कि कई मंत्रालय ऐसे भवनों में काम कर रहे थे, जहाँ आधुनिक प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन था। नए भवनों के निर्माण से इन समस्याओं का समाधान होगा और प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा तीर्थ परिसर में नए प्रधानमंत्री कार्यालय का उद्घाटन किया।
अपना तीसरा लगातार कार्यकाल शुरू करने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) लोगों का PMO होना चाहिए, यह मोदी का PMO नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नए पीएमओ को ऐसी पहचान दी जा सकती है जो “सेवा की भावना” को दर्शाए। इसका उद्देश्य पीएमओ को केवल प्रशासनिक केंद्र न होकर जनता के लिए एक सेवा और पारदर्शिता का प्रतीक बनाना बताया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में हुए नाम बदलने सार्वजनिक कर्तव्य (Public Duty) पर जोर को दर्शाते हैं। राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ रखा गया। प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास 2016 में लोक कल्याण मार्ग नामित किया गया। इसके अलावा, सेंट्रल सचिवालय का नाम बदलकर कर्तव्य भवन रखा गया है। इन बदलावों का उद्देश्य प्रशासनिक और सरकारी संस्थानों को जनता के प्रति उनके कर्तव्यों और सेवा भावना के साथ जोड़ना बताया गया है।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी, जैसे स्थानांतरण, भवनों के नाम और प्रशासनिक बदलाव, समय और आधिकारिक घोषणाओं के अनुसार बदल सकती है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निर्णय, निवेश या आधिकारिक कार्रवाई से पहले संबंधित स्रोतों और सरकारी सूचनाओं की स्वतंत्र पुष्टि करें। लेखक और प्रकाशक किसी भी त्रुटि, परिवर्तन या अप्रत्याशित परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
