Nichodxyz.com

Meghalaya Coal Mine Blast : मेघालय, कोयला, खदान, विस्फोट में मौतों का आंकड़ा और रेस्क्यू की जानकारी।

Meghalaya coal mines blast : मेघालय के East Jaintia Hills जिले में अवैध कोयला खदान में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर दिया है।ताजा अपडेट्स के अनुसार Meghalaya coal mine blast में मरने वालों की संख्या 27 हो चुकी है। राहत और बचाव दल लगातार मौके पर तैनात हैं, और अभी भी मलबे व खदान के अंदर फंसे लोगों की तलाश जारी है। यह हादसा एक कथित अवैध कोयला खनन स्थल पर हुआ है , जिसने एक बार फिर ” rat-hole mining ” और अवैध खनन की खतरनाक सच्चाई को उजागर कर दिया है।

कहां और कैसे हुआ हादसा? 

यह विस्फोट मेघालय के East Jaintia Hills जिले के थांग्स्कु -थांगस्काई इलाके में स्थित एक अवैध कोयला खदान में हुआ शुरुआती। रिपोर्ट के मुताबिक, खदान के अंदर जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद सुरंग का हिस्सा ध्वस्त हो गया और कई मजदूर अंदर फंस गए।हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत एजेंसियों को अलर्ट किया गया।

घटना के बाद से लगातार सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है, लेकिन खदान के अंदर की संकरी और खतरनाक परिस्थितियों के कारण अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

मौतों का आंकड़ा 27 पहुंचा। 

तमाम मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एवं एनडीआरएफ अधिकारियों के अनुसार रेस्क्यू टीमों ने अलग अलग दिनों में शव बरामद किए। 5 फरवरी को 18 शव बरामद, 6 फरवरी को 4 शव बरामद और ताज़ा अभियान में 2 और शव मिले। कुल सत्ताईस कुल मृतक 27 बताए जा रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि अभी भी कुछ मजदूरों के फंसे होने की आशंका है, इसलिए सर्चिंग अभियान जारी है।

कितने लोग घायल हुए हैं?

हादसे में कम से कम नौ लोग घायल बताए जा रहे हैं जिनका इलाज नजदीकी अस्पतालों में चल रहा है।कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।मेडिकल टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।

कौन -कौन सी टीमें राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं?

रेस्क्यू ऑपरेशन में कई एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं, जैसे नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स की तीन टीमें राज्य आपदा राहत की टीमें जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस और उनके साथ मेडिकल और तकनीकी टीमें भी शामिल हैं।

खदान के अंदर गैस, पानी भराव और ढहने के खतरे के बीच ऑपरेशन चलाना बेहद जोखिम भरा बताया जा रहा है।

जांच शुरू होते ही दो लोग हिरासत में लिए गए।

मेघालय के मंत्री Lahkmen Rymbui के अनुसार हादसे की जांच के दौरान दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है। एफआईआर निम्न कानूनों के तहत दर्ज की गई है: भारतीय न्याय संहिता ( BNS) , Mines and minerals (development and regulation) act के तहत मामला दर्ज किया गया है, जांच में यह भी देखा जा रहा है कि खदान में सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं, और विस्फोट का वास्तविक कारण क्या था।

अवैध खनन पर फिर उठे सवाल।

रिटायर रिटायर्ड जस्टिस BP Katakey, जो खनन मामलों की निगरानी से जुड़े हैं, ने मौके का दौरा कर कहा कि इलाके में बड़े स्तर पर अवैध खनन चल रहा था।यह हादसा एक बार फिर मेघालय में जारी illegal coal mining नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

“rat-hole mining” पहले से ही खतरनाक और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह मानी जाती है और इस पर प्रतिबंध के बावजूद कई जगहों पर गुप्त रूप से जारी रहने की बात सामने आती रहती है।

सरकार का बयान और कार्रवाई

मेघालय के मुख्यमंत्री Conrad K Sangma ने कहा है कि: पूरे मामले की विस्तृत जांच होगी और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अवैध खनन पर सख्त रुख  अपनाया जाएगा, उन्होंने ज़ीरो टॉलरेंस नीति की बात दोहराई।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया शोक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

राष्ट्रपति ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि मजदूरों की मौत अत्यंत पीड़ादायक है और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री ने भी शोक संदेश जारी किया और घायलों के जल्द स्वस्थ्य होने की कामना की। साथ ही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष ( PMNRF) से मुआवजे की घोषणा की है।

विस्फोट का कारण क्या था?

फिलहाल, विस्फोट का सटीक कारण आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है। जांच एजेंसियों ने निम्न बिंदुओं पर फोकस किया है।

जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट कारण सामने आएगा।

 

क्यों खतरनाक है Rat- Hole Mining? 

Rat-Hole mining एक ऐसी खनन पद्धति है जिसमें जमीन के अंदर बहुत संकरी और गहरी सुरंगें खोद कर कोयला निकाला जाता है। ये सुरंगे अक्सर अस्थायी होती हैं और इनमें वैज्ञानिक डिज़ाइन, मजबूत सपोर्ट सिस्टम या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता है। इसी वजह से यह तरीका बेहद खतरनाक माना जाता है। सबसे बड़ा खतरा सुरंग धंसने का होता है, जिससे मजदूर अंदर ही फंस सकते हैं। खदानों में जहरीली गैस जमा हो सकती है जो दम घुटने या बेहोशी का कारण बनती है। कई बार अंदर ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम हो जाता है, जिससे जान का जोखिम बढ़ जाता है।

ऐसी खदानों में पानी भराव और गैस दबाव के कारण विस्फोट की संभावना भी रहती है। संकरी सुरंगों के कारण मशीनें अंदर नहीं जापानी, इसीलिए हादसे के समय बचाव कार्य बेहद कठिन और धीमा हो जाता है, यही कारण है कि विशेषज्ञ और पर्यावरण समूह लंबे समय से rat-hole mining पर पूर्ण रोक और सख्त निगरानी की मांग करते रहे हैं।

निष्कर्ष

Meghalaya coal mine blast : सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि अवैध खनन और सुरक्षा लापरवाही का गंभीर परिणाम है। 27 मजदूरों की मौत में कई परिवारों को उजाड़ दिया है।रेस्क्यू ऑपरेशन अभी तक जारी है और जांच एजेंसियां जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

Search and rescue continues after coal mine blast in Meghalaya

 

यह घटना साफ संदेश देती है कि अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई और जमीनी स्तर पर सुरक्षा लागू करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

Exit mobile version