Universe Mystery : क्या Gravity अलग तरह से काम करती है? James Webb की खोज ने छेड़ी नई बहस।

Universe Mystery : ब्रह्मांड को समझने की हमारी कोशिशों में डार्क मैटर सबसे बड़ा रहस्य रहा है।दशकों से वैज्ञानिक मानते आए हैं कि यूनिवर्स का बड़ा हिस्सा डार्क मैटर से बना है, एक ऐसा पदार्थ जो दिखाई नहीं देता लेकिन गुरुत्वाकर्षण के जरिए असर डालता है पर अब एक नया वैज्ञानिक अध्ययन इस सोच को चुनौती दे रहा है।

Universe mystery as James Webb discovery raises questions about gravity
Universe Mystery: Has James Webb Discovered a New Way Gravity Works?

 

नई रिसर्च कहती है, हो सकता है डार्क मैटर हो ही नहीं बल्कि गुरुत्वाकर्षण खुद बड़े पैमाने पर अलग तरह से काम करता हो।वहीं दूसरी ओर Jemes Webb Space Telescope ने डार्क मैटर का अब तक का सबसे डिटेल्ड मैप तैयार किया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है सच क्या है?

गैलेक्सी की स्पीड ने खड़ा किया था डार्क मैटर का सिद्धांत।

वैज्ञानिक जब गैलेक्सियों को देखते हैं तो पाते हैं कि उनके बाहरी हिस्सों में मौजूद तारे बहुत तेज गति से घूमते हैं, सामान्य गुरुत्वाकर्षण नियमों के अनुसार इतनी स्पीड पर तो उन्हें गैलेक्सी से बाहर निकल जाना चाहिए।

लेकिन वे बने रहते हैं मानो कोई अतिरिक्त अदृश्य द्रव्यमान उन्हें पकड़े हुए हो, इसी “missing mass” को नाम दिया गया -डार्क मैटर।

सालों तक यही मॉडल कॉस्मोलॉजी का आधार रहा:

  • डार्क मैटर दिखाई नहीं देता।
  • यह प्रकाश से इंटरैक्ट नहीं करता।
  • लेकिन गुरुत्वाकर्षण के जरिये प्रभाव डालता है।
  • गैलेक्सी संरचना को स्थिर रखता है।

नया दावा: गुरुत्वाकर्षण दूरी के साथ अलग तरह से कमजोर होता है।

हाल ही में एक नए ग्रेविटी मॉडल ने इस धारणा को चुनौती दी है, इस मॉडल के अनुसार गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव बहुत बड़ी दूरी पर Newton के पारंपरिक 1/r नियम से अलग हो सकता है।

रिसर्च में प्रस्ताव है कि बड़े  कॉस्मिक  स्केल पर गुरुत्वाकर्षण 1/r पैटर्न जैसा व्यवहार करता है, यानी यह अपेक्षा से धीमी दर से कमजोर होता है।

इसका असर क्या होगा?

  • गैलेक्सी के किनारे पर भी गुरुत्व मजबूत रहेगा।
  • तारों की तेज रोटेशन को समझाया जा सकेगा।
  • अतिरिक्त डार्क मैटर की जरूरत कम पड़ सकती है।
  • केवल विजबल मैटर से रोटेशन कर्व समझ आ सकता है।

रिसर्चर का कहना है कि यह मॉडल अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन यह संकेत देता है कि गुरुत्वाकर्षण हमारी सोच से ज्यादा जटिल हो सकता है।

क्या इसे डार्क मैटर की थ्योरी खत्म हो जाएगी?

अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगा।खुद शोधकर्ता भी मानते हैं कि उनका मॉडल डार्क मैटर को पूरी तरह रिप्लेस नहीं करता।

क्योंकि डार्क मैटर का उपयोग केवल गैलेक्सी रोटेशन समझाने के लिए नहीं होता, इसका रोल इन चीजों में भी माना जाता है:

  • गैलेक्सी क्लस्टर डायनेमिक्स।
  • ग्रेविटेशनल लेंसिंग।
  • कास्मिक माइक्रोबेब बैकग्राउंड पैटर्न।
  • बड़े पैमाने की ब्रह्मांडीय संरचना।

इसलिए नया मॉडल एक चुनौती जरूर है, लेकिन अंतिम उत्तर नहीं।

इसी बीच James Webb ने बनाया डार्क मैटर का सबसे बड़ा मैप।

जहां एक तरफ नया गुरुत्वाकर्षण मॉडल डॉर्क मैटर पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ Jemes Webb Space Telescope (JWST)  ने डार्क मैटर के वितरण का अब तक का सबसे विस्तृत मानचित्र तैयार किया है।

वैज्ञानिकों ने जेडब्ल्यूएसटी की मदद से अंतरिक्ष के एक छोटे से हिस्से को 250+ घंटों तक ऑब्जर्व किया। इस दौरान :

  • लगभग आठ लाख गैलेक्सियों की पहचान हुई।
  • यह संख्या जमीन आधारित टेलीस्कोप से दस गुना ज्यादा है।

इसके बाद रिसर्च टीम ने Gravitational Lensing तकनीक का उपयोग किया यानी देखा कि अदृश्य द्रव्यमान किस तरह प्रकाश को मोड़ रहा है, इसे डार्कमैटर का नक्शा तैयार किया गया।

Invisible Scaffolding of the universe- ब्रह्मांड का अदृश्य ढाँचा

JWST डेटा का विश्लेषण करने वाले वैज्ञानिकों ने डार्क मैटर को ब्रह्मांड का अदृश्य ढांचा कहा है।

मतलब

  • पहले डार्क मैटर का धुंधला अंदाजा था।
  • अब उसका स्ट्रक्चर ज्यादा साफ दिख रहा है।
  • गैलेक्सियां इस अदृश्य जाल पर टिकी हुई लगती हैं।

यह मैप दिखाता है कि डार्क मैटर ब्रह्माण्ड में जगह जगह क्लस्टर बनाकर मौजूद हैं और वही सामान्य पदार्थों को अपनी ओर खींचता है जिसे तारे और गैलेक्सियाँ बनती हैं।

बिग बैंग के बाद डार्क मैटर की भूमिका।

वैज्ञानिकों का मानना है कि बिग बैंग के बाद:

  • डार्क मैटर और सामान्य पदार्थ लगभग समान रूप से फैले थे।
  • समय के साथ डार्क मैटर पहले clump हुआ।

अगर यह मॉडल सही है, तो डार्क मैटर के बिना गैलेक्सी बनना मुश्किल होता।

दो विरोधी संकेत- विज्ञान के लिए रोमांचक समय

अभी, हमारे पास दो मजबूत लेकिन अलग दिशा के संकेत हैं:

पहला: नया गुरुत्वाकर्षण मॉडल कहता है कि शायद डार्क मैटर की जरूरत नहीं।

दूसरा: JWST ऑब्जर्वेशन डार्क मैटर के प्रभाव का हाई रिजॉल्यूशन मैप दिखा रहा है।

आगे क्या होगा? अगली पीढ़ी के टेलीस्कोप देंगे जवाब

आने वाले समय में, कई मिशन इस बहस को और स्पष्ट करेंगे:

  • Nancy grace roman space telescope
  • बड़े ग्रेविटेशनल लेंसिंग सर्वे।
  • गैलेक्सी क्लस्टर स्टडी।
  • कास्मिक बैकग्राउंड मापन।

अलग अलग स्केल ग्रुप तो मॉडल सही निकला?तो हमें भौतिकी की किताबें अपडेट करनी पड़ सकती हैं और अगर डार्क मैटर मैपिंग और मजबूत हुई तो उसका अस्तित्व और पुख्ता हो जाएगा।

निष्कर्ष: ब्रह्मांड अभी भी रहस्यों से भरा है

डार्क मैटर हो या Modified gravity- एक बात साफ है, हम अभी भी ब्रह्मांड को पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं। नई तकनीक, नए टेलीस्कोप और नए गणितीय मॉडल हमारी समझ को लगातार बदल रहे हैं।

आज की खोजें कल का विज्ञान बदल सकती हैं और यही कॉस्मोलॉजी को इतना रोमांचक बनाता है।हर नया डेटा ब्रह्मांड की कहानी का नया अध्याय खोलता है।

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